हमारा भारतीय समाज कई संस्कृति और कई भाषाओं का अनोखा गुलदस्ता है , गाहे- बगाहे हमें विभिन्न भाषाओँ के उन शब्दों को अंगीकार करने की आवश्यकता महसूस होती है जो हिन्दी में घुली-मिली है । इन्हीं भाषाओं में से एक है अरबी भाषा , जिसके बहुतेरे शब्द हिन्दी और उर्दू भाषा में काफी प्रमुखता के साथ प्रयुक्त होते रहे हैं । वर्णानुक्रम में यद्यपि हम अ श्रेणी के शब्दों की व्याख्या प्रस्तुत कर रहे हैं .....इसीक्रम में एक शब्द आया है "अजान" जिसका प्रयोग उर्दू और हिन्दी में सामान रूप से आम-बोलचाल में होता है ......, आईये इस शब्द के बारे में विस्तार से जानने का प्रयास करते हैं -
(अरबी में अधान: उद्घोषणा), शुक्रवार (जुमे) की सार्वजनिक नमाज़ और पांच दैनिक नमाज़ों के लिये मुस्लिम पुकार। इसकी घोषणा मुअज्जिन करता है, जो अपने अच्छे चरित्र के कारण मस्जिद का सेवक चुना जाता है, छोटी मस्जिदों में वह दरवाजे़ पर या बग़ल में खड़े होकर और बड़ी मस्जिदों में मीनार पर चढ़कर अज़ान देता है। मूलतः अज़ान प्रार्थना के लिये बुलावा था, लेकिन परंपरा के अनुसार, मुहम्मद साहब ने इस बुलावे को ज़्यादा सम्मानजनक बनाने की दृष्टि से अपने शिष्यों से विचार-विमर्श किया, अब्द अल्लाह बिन जायद को सपना आने पर कि निष्ठावानों को कोई आवाज़ लगाकर बुलाए, मामला तय हो गया। सुन्नी मत की मानक अज़ान का अनुवाद इस प्रकार किया जा सकता है: ‘अल्लाह सबसे महान है। मैं मानता हूं कि अल्लाह के अलावा और कोई ईश्वर नहीं है।‘ मैं स्वीकार करता हूं कि मुहम्मद अल्लाह के पैग़ंबर हैं। नमाज़के लिए आओ। मुक्ति के लिए आओ। अल्लाह सबसे महान है। अल्लाह के अलावा और कोई ईश्वर नहीं हैं।‘ पहले वाक्यांश की चार बार उद्घोषणा की जाती है और अंतिम वाक्यांश की एक बार तथा अन्य सभी वाक्यांशों की दो बार उद्घोषणा की जाती है, नमाज़ी प्रत्येक वाक्यांश का तयशुदा जवाब देते हैं। यही है अजान का अभिप्राय ...!

6 comments:

  1. पोस्ट-दर-पोस्ट सचमुच आप भारतीय संस्कृति में प्रयुक्त होने वाले महत्वपूर्ण शब्दों से परिचय करते जा रहे हैं , बहुत अच्छा लग रहा है पढ़कर .....

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  2. पहली बार अजान का अर्थ पता चला ।

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  3. सार्थक विमर्श !

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  4. bahut achhi jaankari mili...
    saarthak prastuti hetu dhanyavaad

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  5. "अ-जान "पसंद आई भाषा .भावार्थ अजान का .

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